Exercise kya hai ? aur exercise ka benifits

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बय्याम  क्या  है  और  बय्याम   का  शरीर पर  क्या   प्रभाब  पड़ता  है 

आज  के  इस  बयस्त  जीवनशैली   में  लोग   शारीरिक  बय्याम  को  उतना  महत्ब  नहीं  देते  है  जिस  कारण  आज  लोगो  का  स्वास्थ  प्रभाबित  हो  रहा  है  जिस  तरह  हमे  जीने  के  लिए  भोजन  जरुरी  है  ठीक  उसी  तरह  हमें  स्वस्थ  रहने  के  लिए  बय्याम  उतना  ही  जरुरी  है  क्यों  की  बय्याम  करने  से  हमारा  शरीर  तो  मजबूत  बनता  ही  है  बल्कि  इससे  हमारा  शरीर  स्वस्थ  रहता  है  और  हमें  कई  बीमारियों  से बचाता  भी  है 

तो  चलिए  जानते  है  की  बय्याम  का  हमारे  शरीर  पर  क्या  प्रभाब  पड़ता  है

तो  दोस्तों  ADVANCE  PEOPLE  के  ब्लॉग  में  आपका  स्वागत  है  आज  मै  इस  लेख  में  बय्याम  का  हमारे  शरीर  पर  क्या  प्रभाब  पड़ता  है  इसके  बारे  में  बिस्तार  से  चर्चा  करेंगे  इसके   पहले  आपको  यह  समझना  होगा   की  बय्याम  क्या  है  बय्याम  कितने  प्रकार  का  होता  है  और  बय्याम  करने  का  तरीका क्या  है  और  इससे  क्या  लाभ  है
तो  चलिए  सबसे  पहले  जानते  है  की  बय्याम  क्या   है

बय्याम  क्या  है   WHAT IS EXERCISE

बय्याम  एक  ऐसी   शारीरिक  क्रिया  है  जिससे   मनुष्य  अपने  शारीरिक  और  मानसिक  क्षमताओं  का  सर्वांगीण  बिकाश  करता  है  बय्याम  करने   से  हमारा  शरीर  तो  मजबूत  बनता  ही  है  बल्कि  यह  हमारे  शरीर  के  रोग  प्रतिरोधक  क्षमता  को  बढ़ाता  है  बय्याम  हमारे  शारीरिक  स्वास्थ  के  साथ -साथ  मानसिक  स्वास्थ  में  भी  सुधार  करता है  जिससे  हमारे  तनाब  आदि  में  कमी  आती  है

बय्याम  के  प्रकार  TYPES OF  EXERCISE

बय्याम  हमारे  सम्पूर्ण  शरीर  के  संस्थान  को  प्रभाबीत  करता  है  अतः  हमें  बय्याम  का  चुनाब  करते   समय  इस  बात  को  देखना  चाहिए  की   बय्याम  शरीर  के  सम्पूर्ण  अंगो  का   लाभ प्रदान  कर  सके   बैसे  तो  बय्याम  के  बहुत  से  प्रकार  होते  है

लेकिन  बय्याम  को  शरीर  पर  पड़ने  बाले  प्रभाबों  के  आधार  6  बर्गो  में  बिभाजीत  किया  जा सकता  है

1  एरोबिक  बय्याम  AEROBIC EXERCISE




मनुष्य  द्वारा  की  गई    भी  शारीरिक  गतिबिधि   जिसमे  शरीर   को  अधिक    ऑक्सीजन  ग्रहण  करने  की   आबश्यकता  होती  है  उसे  हम  ऐरोबिक  बय्याम  कहते  है  इस  बय्याम  को  करने  से  लोगों  के  हिर्दय  क्षमताओं  को  बढ़ाया  जाता  है  इसलिए  इसे  कार्डियोवैस्कुलर  एक्टिविटी  भी  कहा  जाता  है

यह  बय्याम  हमारे  शरीर  फेफड़ा  को  सुदृढ़  बनाता  है   इस  ब्यायम  के  अन्तर्गत  टहलना  जॉगिंग  करना  दौड़ना  स्विमिंग  आदि  क्रियाएँ  शामिल  है

2     एनारोबिक   बय्याम  ANAEROBIC  EXERCISE




  बयक्ति  के  द्वारा   किया  गया  वह  शारीरिक  गतिबिधि  या  बय्याम  जिसको  करने  में  हमें  ऑक्सीजन  की  आबश्यकता  कम  या  उसके  बिना  किया  जाता  है उसे  हम  एनारोबिक  बय्याम  कहते  है  यह  बय्याम  एक अल्पबिधि  के  लिए  उच्च गहनता  बाला  एक   शारीरिक  गतिबिधि  है  एनारोबिक  बय्याम  करने  से  हमारे  शरीर  में  ऑक्सीजन  की  माँग  ऑक्सीजन  आपूर्ति  की  तुलना  में  बढ़  जाती  है

यह  बय्याम  हमारे  शरीर  में  बनने  बाले  लैक्टिक अम्ल  जैसे  पदार्थो  को  सहन  करने  की  क्षमता  को  बढ़ाता   है  जिससे  हमारे  शरीर  के  अन्दर थकान  गति  सहनशीलता  आदी  का  बिकाश  होता  है  यह  बय्याम  हमारे  मांसपेसियों  को भी  मजबूत  बनाता  है  इस  बय्याम  के  अन्तर्गत  भारतोलक  स्पीड रनिंग  आदि  क्रिया  शामिल  है

3  इसोमेट्रिक  बय्याम  ISOMETRIC  EXERCISE




इस  बय्याम  की  शुरुआत   1952  में  HETTINGER MULLER   के  द्वारा  किया  गया  था  इसोमेट्रिक  बय्याम  वह  बय्याम  है  जिसमे   बयक्ति  शारीरिक  गतिबिधि  तो  करता  है लेकिन  उसके  मासपेशियां  पर  कोई  प्रभाब  नहीं  दिखाई  देता  है  उसे  हम  इसोमेट्रिक  बय्याम  कहते  है  इस  तरह  के  बय्याम  करने  से मांसपेसियों  के  लम्बाई  में  परिबर्तन  नहीं  होता  है  फिर  भी  बयक्ति  इसे  लगातार  करे  तो  मासपेशियो  में  हलचल  दिखाई  परता है

इस  बय्याम  को  करने  से  बयक्ति  के  शरीर  के  तापमान  में  बृद्धि  किया  जा  सकता  है  इस  बय्याम  के  अन्तर्गत  भार  उठाना  तीर  चलाना  कुश्ती  आदि  क्रियाए  शामिल  है

4  इसोटोनिक   बय्याम   ISOTONIC  EXERCISE

इस  बाययम  की  शुरुआत  1954  में  DE LOONE  के  द्वारा  किया  गया  था  इसोटोनिक  बय्याम  वह  बय्याम  है  जिसको  करने  से  मस्पेसिओ  का  तनाब कम  हो  जाता  है  और  मासपेशिया  लम्बी हो  जाती  है  इस  तरह  के  बय्याम  को  हम इसोटोनिक  बय्याम  कहते  है   इस  तरह  के  बय्याम से हमारे  शरीर  की   मासपेशिया  की  लम्बाई  तथा  लचीलापन  में  बृद्धि  की  जाती  है  इसोटोनिक  बय्याम  के  अन्तर्गत  दौड़ना  उछलना  कूदना  भार  उठाना  आदि  क्रियाए  शामिल  है

5   इसकिनेटिक  बय्याम  ISOKINETIC  EXERCISE





इस  बय्याम  की  शुरुआत  1968  में  PERRINE  के  द्वारा  किया  गया  था   यह  बय्याम  इसोमेट्रिक  तथा  इसोटोनिक   बय्यामो  का   मिश्रण  है  इस  तरह  के बाययम करने  के  लिए  मस्पेसिओ  पर  दवाब  बनाया  जाता  है  इस तरह  के  बय्यामो  से  शरीर  में  शक्ति    का  बिकाश  होता  है  इसकिनेटिक  बय्याम  शरीर  को  गरमाने  में  सहायक  होता  है  इस  बय्याम  के  अन्तर्गत  साइकिल  चलाना  हाथो  को  हिलाना  आदि  क्रियाए  शामिल  है

6 स्ट्रेचिंग  बय्याम  STREATCHING  EXERCISE



शरीर  के  जोड़ों  को  गति  देने  के  लिए  स्ट्रेचिंग  बय्याम  करना  बहुत  जरुरी  होता  है   आमतौर  पर  यह  एक्सरसाइज  कोई  भी बय्याम  करने  से  पहले  और  बाद  में  किया  जाता  है  स्ट्रैचिंग  एक्सरसाइज  करने  से  हमारी  मासपेशियां  तो  मजबूत  होती  ही  है  तथा  जोड़ों  में  लचीलापन  आता  है  अगर हम  स्ट्रैचिंग   एक्सरसाइज  नहीं  करे  तो  यह  हमारे  मासपेशी  को  नुकसान  पहुँचा  सकता  है

बय्याम  करने  के  पहले  क्या  करे

दोस्तों  अगर  आप  बय्याम  करते  है या  करना  चाहते  है   तो  आपको  बय्याम  करने  से  पहले  कुछ  जरुरी  बातों   को   धयान  देना  होगा  नहीं   तो  यह  आपके  शरीर  को  नुकसान   पहुँचा  सकता   है   क्यों की  अगर  हम गलत  तरीके  से  बाययम  करते  है   तो  यह  हमे  फ़ायदा  नहीं   नुकसान  ही   होगा

तो चलिए  जानते   है   की  बय्याम  करने  से  पहले  हमे  किन  बातो  का  धयान  रखना  चाहिए

1 अगर  आप  कोई  भी बय्याम करते है  या  करना  चाहते  है  तो  सबसे पहले आप  अपना  शरीर  को  उस बय्याम  के  लिए  तैयार  करे  इसके लिए  आप  एक्सरसाइज  करने  के  पहले  अपने  शरीर  को  वार्मअप  जरूर   करे  क्यों  की  वार्मअप  करने  से आप  बय्याम  अच्छी  तरह  से  कर  सकते  है  और  शरीर  में  लगने  बाले  चोटों  से  भ  बच  सकते  है  वार्मअप करने  से शरीर  की  मासपेशिया  खुलती है   वार्मअप  करने  के लिए आप  धीरे –धीरे  रनिंग  करे  अपने  हाथों  को   हिलाये  आदि

2   कोई  भी बय्याम  करने  से पहले  आप  स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज  जरूर      करे  क्योंकि  स्ट्रैचिंग  करने  से  आपके  शरीर  के  जोड़ों  पर  पड़ने     बाला  दबाब  कम  होगा  और आपका  शरीर  खुलेगा  और  आपको  कोई   भी  एक्सरसाइज  करने  में  दर्द  का  अनुभव  नहीं  होगा

3   अगर  आप  कोई  भी  बय्याम  करते  है  तो आप  अपनी  ट्रेनर  की           देखरेख  में करे  या  उनसे सलाह  ले  कर   करे  क्यों की  एक  ट्रेनर  ही      आपके  वर्कआउट  प्लान  के  बारे  सही  जानकारी  देगा  की  आपको         कौन  सा  एक्सरसाइज कब  करना  है  और  कितना  करना  है

4    बय्याम  करने  से  पहले  आप  अपने  शरीर  की  क्षमताओं  को               पहचाने   अपनी  शारीरिक  क्षमताओं  से  ज्यादा  एक्सरसाइज  करने       की  चेस्टा  न  करे  क्योंकि  इससे  आपके  शरीर  में  दर्द  आदि  की           समस्या  उत्पन  हो  जाएगी

5    कोई   भी  बय्याम  आप  खुली  हवा  और  स्वच्छ  बाताबरण  में  करे        तो  बेहतर  होगा  क्योंकि  खुली  हवा  में  बय्याम  करने  से  आपके          शरीर  को  ऑक्सीजन  की  मात्रा  भरपूर  मिलती  रहेगी  और आप             तरोताजा  महसूस  करेंगे

 बय्याम  कब  करना  चाहिए  और  कब  नहीं


  अगर  आप   बय्याम  करते  है  तो  आपको  यह  मालूम  होना  चाहिए   की  बय्याम  कब  करना  चाहिए  और  कब  नहीं  करना  चाहिए  आपको   यह  मालूम  होना  चाहिए  की  बय्याम  करने  का  सही  समय  क्या  है

  तो  चलिए  जानते  है  की  बय्याम  करने  का  सही  समय  क्या  होता  है

1   बय्याम  करने  के लिए  सुबह  का  समय  सबसे  सही  समय  माना          गया  है  क्योंकि  इस  समय   हमारे  शरीर  का   मेटाब्लोजिम  बढ़ा          रहता  है  और  सुबह  का  समय  हम  ज्यादा  सक्रिय  रहते   है

2    हमे  भोजन  के  तुरंत  बाद  बय्याम  नहीं  करना  चाहिए  क्योंकि           भोजन  के   तुरन्त  बाद  बय्याम  करने  से   हमारी  पाचन  क्रिया  में      समस्या  आती  है  अतः  बय्याम  और  भोजन  के  बीच  कम  से  काम      तीन  से  चार  घण्टे  का  अन्तराल  होना  चाहिए

3   बय्याम  करने  के लिए  शाम  के  4  से  5  बजे  का  समय  सही  रहता       है  क्योकि  इस समय  तापमान  बय्याम  करने  के अनुकूल  रहता  है

4    जब  शरीर  में चोट  आदि  लगी  हो  तो    हमें  बाययम  नहीं  करना         चाहिए  क्योंकि  इससे  हमारे  शरीर की  मांसपेसियों  में  दिकत हो          सकती  है 

बय्याम  का  शरीर  पर  प्रभाब

  जैसा  की  हम  जानते  है  हमारा  शरीर  बिभिन्य  अंगो  से मिलकर         बना  है   और  बय्याम  बिभिन्य  अंगो  को  सुचारु  रूप  से  काम        करने  में  मदद   करता  है  यदि  हम  लगातार  बय्याम  करते  है  तो  हमारे शरीर  में  कुछ  स्थाई  और  अस्थाई परिबर्तन  आ  जाते  है   अतः बय्याम  करने  से   हमारे  शरीर  पर  निम्न  प्रभाब  पड़ता  है

1  शरीर  मजबूत  बनता  है

  यदि  हम  लगातार  बय्याम  करते  है  तो  हमारे  शरीर  की  अस्थियाँ

 अधिक  शक्तिशाली   हो  जाती  है  और   उनमे  अधिक  तनाब  सह  लेने    की  शक्ति  उत्पन  हो  जाती   है  तथा  मस्पेसिओ  में  अधिक  देर  तक    कार्य  करने  की  क्षमता  आ  जाती  है  जिससे  हमारा  शरीर   मजबूत      बनता  है

2    रक्त  चाप  (BLOOD PRESSURE)  नियंत्रित  रहता  है

  आज  देश  में  बहुत  से  लोगों  का  रक्त  चाप   के  कारण  म मिर्त्यु  हो   रही  है  इससे  बचने  के  लिए  हमें  नियमित  बय्याम  करना  चाहिए   यदि  हम   बय्याम  करते  है  तो  हमारे  शरीर  का  तापमान  बढ़  जाता   है  जिस  कारण  रक्त  का  संचरण  पूरे  शरीर  में  होने  लगता  है     जिससे  हमारे  शरीर  में  अधिक  मात्रा  में  ऑक्सीजन  प्रभाबित  होता   है  जिससे  हमारे  शरीर  में  रक्तचाप  की  कमी  होती  है

3   मधुमेह ( DIABETES)  नियंत्रित  रहता  है

जो  लोग  मधुमेह  की  बीमारी  से  पीड़ित  है  उन्हें  बय्याम  बहुत  ही  फायदेमंद  साबित  होता  है  अगर  हम  नियमित   बय्याम  करते  है  तो  हमारे  शरीर  में  शुगर  लेवल  सही  रहता  है  और  मधुमेह  आदि  रोगों  से  बचा  जा  सकता  है

4   सहन  शक्ति  की  बृद्धि  होती  है

  नित्य बय्याम  करने  से  हमारे  शरीर  में  सहन  शक्ति  की  बृद्धि  होती    है  लगातार  बय्याम  करने  से  हमारे  शरीर  की  मासपेशियो  में   लैक्टिक  एसिड  को  सहन  करने  की  शक्ति  बढ़  जाती  है  जिससे     हमें  शरीर  में  दर्द  अकड़न   आदि  का  अनुभव   नहीं  होता  है

5   बजन  नियंत्रित  रहता  है

 आज  बहुत  से  लोग  अपने  शरीर  का  बजन  बढ़ने  से  परेशान  रहते      है  क्योंकि  बजन  बढ़ने  से  शरीर  में  बिभीन  प्रकार  की  बीमारियां  होने  लगती  है  अगर  हम  नियमित  बयायाम  करते  है  तो  हमारे  शरीर  का  बजन  नियंत्रित  रहता  है  क्योंकि  बयायाम  करने  से  हमारे  शरीर  में  फालतू  चर्बी  नहीं  जमा  होता  है  और  इस  तरह  हमारा  बजन  नियंत्रित  रहता  है

6    शरीर  स्वस्थ  रहता  है

जो  लोग  बय्याम  या  कोई  शारीरिक  गतिबिधि  नहीं  करते  है  उनके  अंदर  मोटापा  हिर्दयरोग  मधुमेह  आदि  का  खतरा  बना  रहता  है  और  इसके  बिपरीत  जो  लोग  बय्याम  करते  है  उनमे  इन  सभी  रोगों  का  खतरा  कम  रहता  है   और  हमारा  शरीर  स्वस्थ  रहता  है

7  मानसिक  स्वास्थ  को  बढ़ावा  मिलता  है

अगर  हम  नियमित  रूप  से  बय्याम  करते  है  तो  हमारा  मानसिक  स्वास्थ  पर  अच्छा  प्रभाब  पड़ता  है  जिससे  हमारा  मुड़  ठीक  रहता  है  और  हमें  तनाब  आदि  से  मुक्ति  मिलती  है

8   रोगप्रतिरोधक   क्षमता  बढ़ती  है

नियमित  बय्याम  करने  से  हमारे  शरीर  में  रोग  प्रतिरोधक  क्षमता  का  बिकाश   होता  है  जब  हम  बय्याम  करते  है तो  हमारे  शरीर  में  लाल रक्त  कणिकाओं  की  संख्या  बढ़  जाती  है  जो बिभिन्य  रोगों  से  लड़ने  में  मदत  करता  है

9  नींद  अच्छी  आती  है

बय्याम  करने  से   हमारा  शरीर  की  मस्पेसिआ  थक  जाती  है  और  शरीर  का  तापमान  बढ़  जाता  है  जिससे  हमें  नींद  अच्छी   आती  है 

निष्कर्ष   CONCLUSION

तो  दोस्तों  इस  पोस्ट  के  माध्यम  से  मै  बय्याम   क्या   है  और  बय्याम  का   हमारे  शरीर  पर  क्या   प्रभाब  पड़ता  है  बताने  की  कोशिस  की  है   अगर  इस  लेख  में  हमसे  कोई  बात  छूट  गई  है  तो  आप  हमें  बताने  की  कोशिस  जरूर  करे  ताकी  हम  उसको  इसमें  शामिल  कर  इसमें  सुधार  कर  सके  और अगर  यह  लेख  आपको    अच्छा  लगे  तो  इसे  अपने  मित्रो  को  जरूर शेयर  करे 

2 COMMENTS

  1. कितने वर्ष के बच्चा को व्यायाम का शुरुआत करना चाहिए उनकी उम्र सीमा क्या होगी और किस प्रकार से उन्हें व्यायाम करवाना चाहिए और कितना समय करना चाहिए कृपया सुझाव देने का कष्ट करें

  2. बच्चे को 6 वर्ष की उम्र से व्यायाम करवाना चाहिए। उसे 24 घंटे में लगभग 1 घंटा व्यायाम करवाना चाहिए। उसे एरोबिक व्यायाम करवाना चाहिए।

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